अध्याय -6 जीवन बीमा मे शामिल घटक


जीवन बीमा व्यवसाय के घटक

  1. परिसम्पति – कोई भी भौतिक अथवा गैर-भौतिक वस्तु जिसका मूल्य है जैसे जिसे धन के रूप में मापा जा सके। प्रत्येक मानव का मूल्य है जिसे मानव जीवन मूल्य (HLV) के नाम से जाना जाता है। मानव जीवन मूल्य (HLV) निर्धारित करता है कि किसी को पूर्ण संरक्षण हेतु कितना बीमा आवश्यक है।

उदाहरण : मिस्टर महेश प्रति वर्ष 120000 रुपए कमाता है और अपने पर 2400 रुपए कमाता है। मिस्टर महेश की मृत्यु की दशा में कुल कमाई 96000 रुपए  है । माना कि ब्याज 8% है तब मानव जीवन मूल्य (HLV) = 96000/0.8=12,00,000.

  1. जोखिम- मानव से संबद्ध कई प्रकार के जोखिम हैं जैसा बहुत जल्दी मर जाना; बहुत अधिक जीवन जीना, अपंगता का जीवन जीना ।
  2. क्षतिपूर्ति – हानि की घटना में उसको मापना अथवा उसका अनुमान लगाना तथा उसकी भरपाई करना क्षतिपूर्ति कहलाता है ।
  3. समान/निश्चित प्रीमियम – यह निर्धारित प्रीमियम होता है तथा आयु बढ़ने के साथ इसमें वृद्धि नहीं होती तथा समस्त अनुबंध अवधि में यह एकसमान रहता है।
  4. जोखिम पूलिंग का सिध्दांत – यह सौहार्दता / परस्परता के सिध्दांत पर कार्य करता है। इसके तहत विभिन्न लोगों से समान पूल में प्रीमियम एकत्र किया जाता है तथा सामान जोखिम पूल में उसे प्रयुक्त किया जाता है तथा सामान प्रकार जोखिम दावे के लिए प्रयुक्त किया जाता है । किसी भी दशा में एक जोखिम पूल से एकत्र धन को अन्य प्रकार के पूल में प्रयुक्त नहीं किया जा सकता । वितीय बाज़ार में परस्परता/सौहार्दता जोखिम कम करने हेतु एक महत्वपूर्ण तरीका है, तथा दूसरा विविधिकरण है. दोनों मूल रूप से एक दूसरे से भिन्न हैं।

संविदा/अनुबंध

बीमा लेने का अर्थ संविदा में शामिल होना है। यहाँ बीमा कंपनी और बीमित (पालिसीधारक) के बीच संविदा/अनुबंध  होता है ।