IC38 Hindi Chapter Notes 2


अध्याय 2   ग्राहक सेवा


ग्राहक सेवा

ग्राहक व्यापार का जीविका प्रदान करता है और कोई भी उद्यम उनकी उपेक्षा नहीं कर सकता।

बीमा के मामले में ग्राहक सेवा और संबंधों की भूमिका अन्य उत्पादों की तुलना में कहीं अधिक महत्वपूर्ण है।

क्योंकि बीमा एक सेवा है। बीमा एक अमूर्त वस्तु है।

यह बीमा कंपनियों और उनके कर्मियों, जिनमें उनके एजेंट भी शामिल है,  के लिए आवश्यक है कि उच्च गुणवत्ता युक्त सेवा प्रदान करके ग्राहक को प्रसन्न करें।

ग्राहक सेवा और बीमा:

बीमा बिक्री में सफलता का राज अपने ग्राहकों की सेवा करने के लिए प्रतिबद्धता है।

ग्राहक आजीवन मूल्य को उस आर्थिक लाभ  के रूप में परिभाषित किया जा सकता है जो समय की एक लंबी अवधि में एक ग्राहक के साथ एक उत्तम संबंध बनाने से प्राप्त होती है।

उत्तम ग्राहक सेवा प्रदान करने में बीमा एजेंट की भूमिका

i) बिक्री के प्वाइंट – सेवा के लिए प्रथम बिंदु बिक्री के बिंदु हैं। एजेंट को ग्राहक की आवश्यकता को समझाने और उत्तम उत्पादों के लाभों को सुझाव देने में सक्षम होना चाहिए। एक एजेंट की भूमिका एक निजी वित्तीय योजनाकार और सलाहकार की तरह होती है।

ii) प्रस्ताव के स्तर – एजेंट को प्रस्ताव फार्म भरने में ग्राहकों की मदद करनी चाहिए । यह महत्वपूर्ण हैं कि एजेंट को प्रस्ताव फॉर्म भरते समय प्रस्तावक के समस्त संदेहों को स्पष्ट करना चाहिए।

iii) स्वीकृति चरण – ग्राहक को FPR सौंपने में ग्राहकों के मन में एजेंट के प्रति एक निश्चितता और विश्वास उत्पन्न होता है। पॉलिसी बांड की डिलिवरी एक अन्य प्रमुख अवसर है।

iv) प्रीमियम भुगतान – पालिसी के निरसन से बचने हेतु देय प्रीमियम के लिए एजेंट अनुस्मारक कॉल के माध्यम से अपने ग्राहकों के साथ लगातार संपर्क में रह सकता है।

v) दावों का निपटान – एजेंट दावा निपटान के समय जांच चरण के दौरान पॉलिसी धारक की आवश्यक जानकारी उपलब्ध करा कर महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

संचार कौशल – एक एजेंट के प्रभावी प्रदर्शन के लिए एक प्रमुख कौशल जो होना चाहिए वह है व्यवहार  कुशलता। व्यवहार  कुशलता अन्य कर्मचारियों, ग्राहकों के साथ प्रभावी ढंग से बातचीत करने की क्षमता से संबंधित एक कौशल है। एक अच्छे संबंध निर्माण में विश्वास प्रमुख भूमिका निभाता है जिसे आप आकर्षण; समय पर अपनी सेवा देने हेतु उपस्थित होकर,  अपने ग्राहकों में उत्पन्न कर सकते हैं।

संचार के कई रूप हो सकते हैं – मौखिक; लिखित; गैर-मौखिक; शारीरिक हाव-भाव।

प्रभावी श्रवण के तत्व– ध्यान देना ,  प्रतिक्रिया उपलब्ध कराना, उचित रूप से जवाब देना, सहानुभूतिपूर्ण श्रवण और आलोचनात्मक नहीं होना.

गैर मौखिक संचार 1. i) उत्तम प्रथम  संपर्क बनाना हमेशा समय पर होनाअपने आप को उचित ढंग प्रस्तुत करना एक गर्मजोशीयुक्त, आत्मविश्वास और विजयी  मुस्कान।खुले, आत्मविश्वास और सकारात्मक होते हुए  दूसरे व्यक्ति में रुचि लेना।

शारीरिक भाव् भंगिमा – यह गतिविधियों , संकेतों,  इशारों,  व चेहरे के  भाव को व्यक्त करता है। जिस तरह से हम बात करते हैं, चलते हैं, बैठते हैं और खड़े होते हैं को शामिल करता है।

श्रवण कौशल: सक्रिय होकर सुनना:जहां हम न केवल शब्दों को  बल्कि उससे भी अधिक महत्वपूर्ण, बात या किसी अन्य के द्वारा भेजा जा  रहा पूरा   संदेश को सुनने के लिए प्रयास करते हैं।

1. ध्यान देना

2. प्रदर्शन करना कि आप सुन रहे हैं – शारीरिक भाषा का प्रयोग यहाँ एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।iii.

3. प्रतिपुष्टि प्रदान करना आलोचनात्मक नहीं होना – इस तरह के दृष्टिकोण से श्रोता को न चाहते हुए भी वक्ता को बोलने देना तथा इसे समय की बर्बादी समझना।

4. उचित रूप से प्रतिक्रिया देना3. सहानुभूतिपूर्ण सुनना – वास्तविक रूप से सहानुभुत व्यक्त करना तथा स्वंय को दुसरे के स्थान पर रख कर उसके दर्द  के अनुभव को महसूस करना।