अध्याय 14   दस्तावेज़ीकरण/प्रलेखन – पालिसी स्थिति –II


अनुग्रह अवधि:

” अनुग्रह अवधि ” खंड पॉलिसीधारक को प्रीमियम का भुगतान करने के निर्धारित समय की अवधि से अतिरिक्त दिए गए समय को कहा जाता है।

अनुग्र अवधि का मानक समय एक महीने या 31 दिनों का होता है जो नियत तारीख के बाद अगले दिन से माना जाता है।

हालांकि प्रीमियम देय बनी रहता है  और यदि  पॉलिसीधारक इस अवधि के दौरान मर जाता है, तो बीमा कंपनी मृत्यु लाभ से प्रीमियम की कटौती कर सकती है। अगर प्रीमियम अनुग्रह अवधि के बाद भी नहीं जमा कराया जाता है तो पालिसी को निरस्त/समाप्त (lapsed) माना जायेगा  ऐसी दशा में बीमा कंपनी मृत्यु लाभ का भुगतान करने हेतु बाध्य नहीं है हाँ , गैर जब्ती प्रावधानों के तहत जमा राशि वह प्रदान करती है ।

चूक (lapse):

यदि पालिसी का प्रीमियम अनुग्रह के दिनों के दौरान भी भुगतान नहीं किया गया, तो पॉलिसी को निरस्त मान लिया जा सकता है।

बहाली / पुनरुद्धार:

बहाली प्रक्रिया वह प्रक्रिया है जिसमे जीवन बीमा कंपनी एक समाप्त (lapsed) हुए पालिसी को पुनः बहाल करती है जो या तो प्रीमियम का भुगतान न करने के कारण या गैर-जब्ती प्रावधानों के तहत समाप्त कर दी गई थी।

पालिसी की बहाली की शर्तें:

  • ब्याज के साथ शेष प्रीमियम का भुगतान
  • बहाली के लिए शुल्क
  • निरंतर अच्छे स्वास्थ्य और आय का प्रमाण
  • जोखिम के कवर में कोई वृद्धि नहीं
  • समय सीमा के अंतर्गत पालिसी के निरस्त होने की तिथि से 5 वर्ष तक भारत में निवास।
  • शेष ऋण का भुगतान।
  • अगर बीमित राशि बड़ी है नवीनतम मेडिकल जांच की आवश्यकता हो सकती है।
  • पुनरुद्धार वास्तव में अधिक लाभदयक होती है क्योंकि एक पालिसी खरीदने हेतु बहाली के समय आयु के आधार पर उच्च प्रीमियम देना होगा।

नीति के पुनरुद्धार के उपाय:

  1. साधारण पुनरुद्धार: इसमें ब्याज के साथ प्रीमियम की शेष का भुगतान शामिल है। जब पॉलिसी या पालिसीधारी ने सरेंडर वैल्यू प्राप्त कर ली है।
  2. विशेष पुनरुद्धार: यदि पॉलिसी 3 साल के लिए संचालित की गई है और न्यूनतम समर्पण मूल्य प्राप्त नहीं की गई है , तो विशेष पुनरुद्धार किया जाता है।  जब निरस्त पॉलिसी के प्रारंभ होने की मूल तारीख से दो साल के भीतर नई पालिसी लिखी/ली गई है ।
  3. ऋण सह पुनरुद्धार: ऋण देना और पालिसी का पुनरुद्धार एक साथ करना
  4. किस्त पुनरुद्धार: जब पॉलिसीधारक एकमुश्त प्रीमियम की बकाया राशि का भुगतान करने में सक्षम नहीं है और विशेष पुनरुद्धार योजना के तहत पालिसी को पुनर्जीवित नहीं किया जा सकता है।

गैर जब्ती प्रावधान:

यदि प्रीमियम लगातार कम से कम 3 साल के लिए भुगतान किया गया है,तो  उपार्जित समर्पण मूल्य का भुगतान किया जाएगा।
समर्पण मूल्य: यह चुकता मूल्य का एक प्रतिशत है। प्रीमियम भुगतान के प्रतिशत के रूप समर्पण मूल्य गारंटी समर्पण मूल्य कहलाता है।

पॉलिसी ऋण:1. जब एक पालिसी नकद मूल्य प्राप्त करती है, तो  पॉलिसीधारक बीमा को गतिमान रखते हुए धन (ऋण) उधार ले सकता है।2. यह आमतौर समर्पण मूल्य के एक प्रतिशत (90%) तक सीमित होता है ।3. पालिसी को बीमा कंपनी के पक्ष में आवंटित करना पड़ता है।4. बीमा कंपनियां ऋणों पर ब्याज वसूलते हैं।नामांकन:1. इस प्रक्रिया में बीमित व्यक्ति उसकी मृत्यु के बाद बीमित राशि का भुगतान किसे किया जायेगा उसका उल्लेख करता है।2. एक नामांकित व्यक्ति का पूरे दावे या हिस्सा का कोई अधिकार नहीं है।3. बीमा अधिनियम 1938 की धारा 39 के अंतर्गत एक बीमा पॉलिसी के नामांकन की अनुमति होती है।बीमा अधिनियम 1938 की धारा 39 के प्रावधान  • पालिसी को खरीदे जाते समय या उसके बाद नामांकन किया जा सकता है• नामांकन MWP अधिनियम की धारा 6 पर  लागू नहीं होती है।• पॉलिसी की धनराशि का भुगतान जीवित प्रत्याशियों को किया जाता है• असाइनमेंट (किसी को पालिसी सौपने से)  नामांकन रद्द हो जाता है •  परिवर्तन या नामांकन को रद्द करने की अनुमति होती है।• नामांकन इंडोर्समेंट (endorsement) के द्वारा किया जाएगा।• जहाँ नामांकित व्यक्ति नाबालिग है उस दशा में पॉलिसी धारक द्वारा एक व्यक्ति नियुक्त किया जाना चाहिए।• जिस व्यक्ति को नियुक्त किया गया था वह नामांकित व्यक्ति के बालिग होते ही अपनी प्रस्थिति/अधिकार  खो देता है।• नामांकित व्यक्ति हेतु कोई  विशेष हिस्सा नहीं बनाया जा सकता है। असाइनमेंट:संपत्ति (पालिसी) के अधिकारों का हस्तांतरण।असाइनमेंट के प्रकार:सशर्त काम:इसमें व्यवस्था  है कि पालिसी की परिपक्वता पर या असाइनी की मृत्यु पर  पालिसी बीमित व्यक्ति के अधिकार में हो जाती है।पूर्ण असाइनमेंट: इसमें असाइनर के अधिकार, शीर्षक और पालिसी में असाइनर के हित बीमा कंपनी को स्थानांतरित कर  दिए जाते हैं।जब पालिसी  ऋण के लिए बीमा कंपनी के पास असाइन्मेंट किया जाता है तो  नामांकन रद्द कर दिया जाता है।

 अंतर के आधारनामांकन असाइनमेंट
नामांकन

या असाइनमेंट क्या है

नामांकन मृत्यु दावा प्राप्त करने के लिए एक व्यक्ति की नियुक्ति की प्रक्रिया हैअसाइनमेंट बीमा पॉलिसी के शीर्षक किसी अन्य व्यक्ति या संस्था को हस्तांतरण करने की प्रक्रिया है
नामांकन या असाइनमेंट  कब किया जा सकता है?

 

नामांकन या तो प्रस्ताव के समय या पॉलिसी शुरू होने के बाद किया जा सकता है।असाइनमेंट पॉलिसी शुरू होने के बाद किया जा सकता है।
कौन नामांकन या असाइनमेंट कर सकते हैं

 

नामांकन केवल बीमित द्वारा अपने ही जीवन पर  लिया जा सकता हैअसाइनमेंट केवल पालिसी के स्वामी द्वारा किया जा या पालिसीधारी द्वारा किया सकता है या बीमित द्वारा, यदि वह पालिसी धारी/असायिनी हो।
यह कहां लागू होता है?

 

यह केवल वहां लागू होता है, जहां  बीमा अधिनियम, 1938 लागू हैदेश की संपत्ति के हस्तांतरण से संबंधित कानून के अनुसार यह समस्त दुनिया में लागू होता है।
क्या पॉलिसीधारक का पालिसी पर नियंत्रण रहता है

 

पॉलिसीधारक का पॉलिसी के  शीर्षक पर नियंत्रण बरकरार रहता है और नामांकित को पालिसी हेतु मुकदमा करने का कोई अधिकार नहीं है ।जब तक पालिसी का री- असाइनमेंट न किया गया है ,पॉलिसीधारक, शीर्षक और ब्याज खो देता है। तथा असाइनी पालिसी के तहत मुकदमा कर सकता है
 क्या एक गवाह की आवश्यकता होती है?गवाह की आवश्यकता नहीं है।गवाह अनिवार्य है।
क्या उनके कोई अधिकार होते है?नामांकित व्यक्ति का पालिसी पर  कोई अधिकार नहीं है।असाइनी (assignee) का पालिसी पर पूरा अधिकार होता है,
क्या इन्हें रद्द किया जा सकता है?

 

नामांकन को रद्द या पॉलिसी की अवधि के दौरान किसी भी समय रद्द किया जा सकता है।एक बार किया गया  असाइनमेंट को रद्द नहीं किया जा सकता है, लेकिन फिर पुनः री-असाइनमेंट किया जा सकता है।
नाबालिग के मामले में

 

यदि नामांकित व्यक्ति नाबालिग है तो एक अभिभावक/व्यक्ति नियुक्त किया जाता है।यदि समनुदेशिती (assignee) एक नाबालिग है, तो एक अभिभावक नियुक्त किया जाता है।
 क्या पद के उम्मीदवार के नामांकित व्यक्ति या समनुदेशिती (assignor)  की मृत्यु के मामले में क्या होता है?यदि मृत्यु नामांकित व्यक्ति की मृत्यु हो जाती है तो इस दशा में , मृत्यु दावा की राशि बीमित व्यक्ति के कानूनी वारिसों को देय होगी।परम  समनुदेशिती (absolute assignee) की मृत्यु के मामले में उसके कानूनी वारिस को पालिसी प्राप्त होगी।
 बीमित व्यक्ति की मृत्यु के बाद और मृत्यु के दावे के भुगतान से पहले यदि नामांकित व्यक्ति की या समनुदेशिती की मृत्यु के मामले में क्या होता है?यदि मृत्यु दावे के निपटान से पहले नामांकित व्यक्ति की मृत्यु हो जाती है तो इस दशा में , मृत्यु दावा की राशि बीमित व्यक्ति के कानूनी वारिसों को देय होगी।निपटान से पहले समनुदेशिती की मृत्यु की दशा में  पालिसी की राशि समनुदेशिती के कानूनी वारिसों  को प्राप्त होती है न कि उस असाइनर को जो बीमित है
क्या लेनदार पालिसी को कुर्क/संलग्न कर सकते हैं?

 

लेनदार उस बीमा पालिसी को कुर्क/संलग्न कर सकते हैं , जिसमे नामांकित व्यक्ति होता है।जब तक असाइनमेंट ने लेनदारों को धोखा न दिया हो, लेनदार पालिसी को कुर्क नहीं कर सकते

डुप्लिकेट पालिसी:यदि बीमित व्यक्ति जीवन बीमा पॉलिसी के मूल दस्तावेज खो देता है तो  बीमा कंपनी  अनुबंध में कोई भी  बदलाव किए बिना डुप्लिकेट पालिसी जारी करेगी।  दावे को ज़मानत या बिना जमानत एक क्षतिपूर्ति बांड प्रस्तुत करने पर निपटाया जा सकता है।

बदलाव: • पॉलिसीधारक पॉलिसी के नियम और शर्तों में परिवर्तन के लिए कह सकते हैं।• यह बीमा कंपनी और बीमित दोनों की सहमति के अधीन है। • आम तौर पर प्रीमियम जमा करने के मोड , नाम व् पते  में परिवर्तन, DAB या PDB आदि के अनुदान के लिए अनुरोध  जैसे कुछ साधारण परिवर्तन को  छोड़कर पालिसी में  1 वर्ष के दौरान परिवर्तन की अनुमति नहीं दी जाती है।

परिवर्तन के मुख्य प्रकार जिनकी अनुमति दी जाती है : 1. बीमा या अवधि के कुछ वर्गों में परिवर्तन [जहां जोखिम बढ़ा नहीं है] 2. बीमित राशि में कमी 3. प्रीमियम के भुगतान की विधि (mode)  में परिवर्तन 4. पालिसी के  प्रारंभ होने की तिथि में परिवर्तन5. पालिसी को  दो या दो से अधिक में विभाजित करना 6. एक अतिरिक्त प्रीमियम या प्रतिबंधात्मक धारा का हटाया जाना।7. नाम में सुधार भुगतान के लिए निपटान विकल्प और  दावे और दोहरी  दुर्घटना लाभ के अनुदान ।