Hindi IC-33 notes Chapter – 8

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  • किसी भी ग्राहक की दो प्रारम्भिक आवश्यकताए निवेश व् सरक्षा है चाहे वह किसी भी आयु वर्ग में हो या किसी भी समय के दौर में
  • यदि तथ्यों की प्राप्ति में यदि प्रमुख ध्यान स्वास्थ्य सुरक्षा जरुरतो व् सम्पति खरीद योजना पर होगा तो वह ग्राहक जिससे सूचना प्राप्त की जा रही है सेवानिव्रती की अवस्था में हो सकता है
  • विवाद की स्थिति में व्यक्ति उपभोक्ता मंच में जा सकता है
  • यदि सुचना व् तथ्य संग्रहण के दौरान यह ज्ञात होता है कि ग्राहक की विभिन्न प्रकार की आवश्यकताए है जैसे परिवार की आय की सुरक्षा हेतु परिवार की स्वास्थ्य सम्बन्धी प्लानिंग की आवश्यकता बच्चो की शिक्षा संबंधी आवश्यकताए तथा पुत्री की विवाह में व्यय के लिए तो इंडोमेंट पॉलिसी प्रथम प्राथमिकता ‘टर्म पॉलिसी ‘ लेनी होगी
  • यदि ग्राहक की आवश्यकता पुत्र पुत्री की विवाह ,परिवार हेतु बचत , बच्चो हेतु सुरक्षा है तो इनमे से सबसे कम प्राथमिकता वह विवाह को देगा
  • म्रत्यु के समय का निर्धारण नहीं किया जा सकता अत: पॉलिसी को अल्प आयु में ही ले लेना चाहिए
  • वास्तविक आवश्यकताए ही सच्ची आवश्यकताए है तथा अनुभूत आवश्यकताए ग्राहक के विचार व् इच्छाओ से संबंध है
  • इक्विटी फार्म से प्राप्त निवेशो को उच्च जोखिम में वर्गीक्रत किया जा सकता है
  • सेवानिव्रती की चरण में व्यक्ति कोई सुरक्षा कवच की आवश्यकता नहीं होती
  • लाभ पॉलिसी व्यक्ति को दी जा सकती है किन्तु प्रतिभू (surety ) प्रमुख व्यक्ति तथा पार्टनर का बीमा नहीं
  • बच्चो की विवाह पश्चात जब वे अपने जीवन में स्थिकरण की और आकरसर हो रहे होते है तो यह मन जा सकता है कि पिता सेवानिव्रती के पूर्व अवस्था में है
  • यदि व्यक्ति विवाहित है तथा उसके माता पिता पर आश्रित है तो चाहे उसकी कोई संतान नहीं है , उसकी प्रथम प्राथमिकता आयु की सुरक्षा है
  • यदि एक महिला को अपनी पति की म्रत्यु पर कुछ धनराशी प्राप्त होता है तो उसका प्रथम कार्य निवेश प्रबंध है
  • व्यय योग्य आय का अर्थ है अतिरिक्त राशी जिसे व्यक्ति निवेशित कर सकता है
  • एक महंगी कार खरीदना एक अनुभूत आवश्कता है न कि वास्तविक आवश्यकता है
  • व्यक्ति की आयु जितनी कम होगी उतनी ही जिम्मेदारी ज्यादा होगी
  • आवश्कता विश्लेषण में व् घोषित व् अघोषित आवश्यकताओ की पूर्ति हेतु वितीय प्रावधानों को पहचान है
  • निजी क्षत्र में कार्यरत व्यक्तियों हेती कोई निर्धारित सेवानिव्रती आयु नहीं है
  • प्रोफेशनल व्यापार बाजार आवश्यकता आधारित बिक्री करता है
  • आवश्कता आधारित बिक्री में ग्राहक को उसकी आवश्यकतानुसार पॉलिसी बेचना है
  • यदि ग्राहक स्वास्थ्य योजना व् सेवानिव्रती योजना के बारे में अधिक जानना चाहता है या रुचियुक्त है तो वह पूर्व सेवानिव्रती के चरण में है
  • यदि एक व्यक्ति अपनी आय को सुरक्षित रखना चाहता है तथा चाहता है कि यदि उसकी म्रत्यु नहीं होती है तो वह बीमित राशी पायेगा इस दशा में उसे रिटर्न आफ पॉलिसी विकल्प लेना चाहिए ?
  • अनुभूत आवश्यकताए में है जो ग्राहक द्वारा महत्वपूर्ण माने जाते है
  • दोहरी आय वाला परिवार उसे कहते है जिसमे दोनो पति पत्नी धनोपार्जन करते है
  • यदि एक परिवार में पति पत्नी तथा माना 2 बच्चे है तो हालाँकि सबसे महत्वपूर्ण आयु का संरक्षण है परन्तु बच्चो का प्लान व् बचत प्लान भी महत्वपूर्ण है
  • यदि एक विवाहित व्यक्ति का एक बच्चा है आय की सुरक्षा के पश्चात् उसकी दूसरी प्राथमिकता बच्चो का प्लान लेना होगा
  • यदि स्वास्थ्य प्लान में केस लेस उपचार सुविधा उपलब्ध न हो तो पॉलिसी धरी को स्वयं ही व्यय वहां करना पड़ता है तथा बाद में वह बीमा कंपनी के पास अपना दावा प्रस्तुत करता है
  • तथ्यों व् सूचनाओ की जानकारी से सलाहकार ग्राहक को वितीय आवश्यकताओ के बारे में जन सकता है
  • संभावित ग्राहक के पास जाते समय सलाहकार को वितीय योजना अभ्यास का विवरण साथ में ले जाना चाहिय क्योंकि व्यक्ति अपनी वास्तविक आव्श्यक्ताओ को नहीं समझ पता तथा उन्हें प्राथमिकता नहीं दे पाता
  • प्रथम पॉलिसी लेते समय ग्राहक व्यक्तिगत विवरण , रोजगार विवरण, व पारिवारिक विवरण, लिया जाता है
  • यदि व्यक्ति अपने 20 वर्ष के प्रारम्भिक वर्षो में है तथा अभी हाल में ही धनार्जन शुरू किया है तो उसका जोखिम कम होता है
  • सामान्यत:19 वर्ष के व्यक्ति की प्रमुख आवश्यकता उसकी स्वय की सुरक्षा है बजाय होम लों सुरक्षा आश्रितों की सुरक्षा व् बच्चो के भविष्य की सुरक्षा के
  • यदि एक व्यक्ति अपने परिवार में एक मात्र धन अर्जन करने वाला प्राणी है तो उसका प्राथमिकता परिवार की वितीय सुरक्षा करना है चाहे उसने अपने बैंक में प्रयाप्त राशी रखी है
  • प्रत्येक व्यक्ति का व्यय करने का निजी ढंग होता है अन्यो से भिन्न होता है एक व्यक्ति को अपनी वितीय योजना बनाते समय अपनी आय को भी दयां में रखना चाहिए क्योंकि व्यक्ति के आय व् व्यय में संबंध होता है
  • स्वरोजगार में रत व्यक्तिओ को चिकित्सा बीमा कराना होता है बजाय उनके जो निजीक्षेत्र की कम्पनी में रत है , निजी क्षत्र के कर्मचारी अपनी नोकरी से सबंध चिकित्सा कवर का लाभ उठाते है

 

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